Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 36, Verse 9
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 36, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 36 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
स्वसत्तामात्रसंपन्नं पदमस्मिन्स्वतेजसि ।
न किंचन च संपन्नमन्यदौष्ण्यादिवानले ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
इस स्वप्रकाशस्वरूप आत्मतत्त्व
में अपनी एकमात्र सत्ता से जगत्नामधारी विलक्षणता यद्यपि प्रतीत हो रही है; तथापि वास्तव में वह
कुछ भी नहीं है । जैसे अग्नि में ज्वाला, विस्फुलिंग, प्रकाश आदि विलक्षणता प्रतीत हो रही भी
उष्णस्वभाव अग्नि से दूसरा कुछ भी नहीं है, वैसे ही प्रकृत में भी समझना चाहिए