Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 36, Verse 15
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 36, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 36 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
अद्याप्येष सदा प्रातः प्रातरप्यद्यतां गतः ।
न वाद्यमद्य न प्रातस्त्वद्य प्रातश्च वा सदा ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
यह साठ घड़ी का अद्यस्वरूप होता हुआ भी निरन्तर प्रातःकालरूप
(प्रारम्भ के त्रिमुहूर्तात्मक कालरूप) है । प्रातःकाल स्वरूप होता हुआ भी अद्यस्वरूपता प्राप्त करता
है । वास्तव में न तो वह मुहूर्तरूप है, न अद्यरूप है और न प्रातःकालस्वरूप ही है, अथवा सदा अद्यस्वरूप
ओर प्रातःकालस्वरूप ही हे