Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 36, Verse 18

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 36, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 36 · श्लोक 18

संस्कृत श्लोक

यस्मिन्सर्वं यतः सर्वं यः सर्वं सर्वतश्च यः । यश्च सर्वमयो नित्यं तस्मै सर्वात्मने नमः ॥ १८ ॥

हिन्दी अर्थ

इस वितितत्व का पहले साक्षात्कार कर प्रह्लाद ने उसे प्रणाम किया था, इसका स्मरण कराते हुए उपसंहार करते हैं। जिस परमात्मा में यह समस्त प्रपंच विद्यमान है, जिससे यह सब उत्पन्न हुआ है, जो सर्वस्वरूप है, जो चारों ओर से व्याप्त है एवं जो सर्वमय है, उस सर्वात्मक परमात्मा को बार-बार नमस्कार करता हूँ