Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 36, Verse 11

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 36, verse 11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 36 · श्लोक 11

संस्कृत श्लोक

गर्भीकृतमहाकल्पो निमेषोऽसावुदाहृतः । आक्रान्तकल्पेनानेन न संत्यक्ता निमेषता ॥ ११ ॥

हिन्दी अर्थ

इस चितितत्त्व मे कालकृत दीर्घता और सूक्ष्मता का भेद नहीं है, इस आशय से कहते हैं। उस चितितत्त्व ने महान्‌ कल्प जैसे काल को अपने उदर में समा लिया है और वह निमेषमात्र कालस्वरूप है, यह भी मुनिलोग कहते हैं। यद्यपि इसने महान्‌ कल्परूपी काल के ऊपर अपना पैर जमा रक्खा है; तथापि अपनी निमेषमात्रस्वरूप कालरूपता का भी परित्याग नहीं किया है