Guru's AddaGuru's Adda

Upashama Prakarana (Dissolution) · Sarga 1

22 verse-groups

  1. Verse 1उपशम प्रकरण पहला सर्ग मध्याह्लकाल की शंखध्वनि से सभा के उत्थान का वर्णन तथा वसिष्ठजी का आ…
  2. Verses 2–12यहाँ पर स्थिति का प्रतिपादन करनेवाली श्रुतियों के तात्पर्य का वर्णन करने के पश्चात उपसंहा…
  3. Verses 13–15उस समय वहाँ पर बैठे हुए अन्यान्य राजा ओर मुनि, जिनके चित्तरूपी रत्न भली-भाँति धुल गये थे,…
  4. Verses 16–18तदुपरान्त मुनि ने सभा में अपनी उपदेश वाणियों का उपसंहार किया। जिस गुण का जनों को आह्नादित…
  5. Verse 19मध्याह समय में करने योग्य द्विजातियों का नियमतः प्राप्त कर्तव्य कर्म नष्ट न हो; इसलिए उसक…
  6. Verse 20हे सुन्दर, आप भी उठिए । हे आचारचतुर, स्नान, दान, अर्चन, पूजन आदिरूप सब सत्‌क्रियाओं का अन…
  7. Verse 21ऐसा कह कर मुनिजी उठे । जैसे उदयाचल के शिखर से चन्द्रमा के साथ सूर्य उदित हों वैसे ही मुनि…
  8. Verse 22उन दोनों के उठने पर मन्द मन्द वायु से कम्पित भँवररूपी नेत्रवाली वह सारी सभा उठने के लिए च…
  9. Verse 23सिर की मालाओं से उठ रहे भँवरों के दलों से अलंकृत वह सभा अस्ताचल में (७७) चंचल सूँड़वाली ग…
  10. Verse 24एक के शरीर के दूसरे के शरीर के साथ टकराने के कारण सभा में हजारों बाजू-बन्द चूर-चूर हो गये…
  11. Verse 25उड़ रहे ओर मालाओं से गुँथे हुए मुकुटों पर मँडरा रहे भँवरों ने घुंघुम ध्वनि से उस सभा को ग…
  12. Verse 26कान्तारूपी लताओं के हाथरूपी पल्लवो में सुन्दर चँवररूपी मंजरीवाली वह सभा क्षुब्ध गजराजों क…
  13. Verse 27उस सभा ने चमक रही कड़ों की कान्तियों से सब के वस्त्र लाल कर दिये थे और परस्पर के आकर्षण फ…
  14. Verse 28उस सभा ने इधर-उधर उड़ रहे कपूर के चूर्ण से और उसके सदुश हिम कणों से सफेद मेघ बना रक्खे थे…
  15. Verse 29चंचल मस्तक मणियों के अग्रभाग से उस सभा के आकाश का मध्यभाग लाल हो गया था, अतएव वह जिसमें न…
  16. Verses 30–31रत्नों के किरणरूपी जलप्रवाह मेँ मुखरूपी कमलो से ठसा-ठस भरी हुई नुपुरो की ध्वनिरूपी सारसवा…
  17. Verse 32सैकड़ों राजाओं से व्याप्त, विस्तृत वह सभा सैकड़ों पर्वतो से व्याप्त प्राणियों की परम्पराओ…
  18. Verses 33–36सुमन्त्र और अन्यान्य मन्त्री, जो ब्रह्मरस और जल के विहारज्ञान में बडे निपुण थे, श्रीवसिष्…
  19. Verse 37बिताई
  20. Verses 38–39जैसे देवताओं के समूह से अनुगत सर्वलोक नमस्कृत भगवान ब्रह्मा ब्रह्मलोक को जाते हैं, वैसे ह…
  21. Verse 40तदुपरान्त अपने आश्रम स्थान से उन्होंने अपने चरणों पर गिरे हुए राम आदि सब दशरथ पुत्रों को…
  22. Verse 41आकाश में रहनेवाले, भूमि में रहनेवाले और पाताल में रहनेवाले उन सबको, जो कि उत्तम-उत्तम गुण…