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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 1, Verse 26

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 1, verse 26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 1 · श्लोक 26

संस्कृत श्लोक

कान्तालताहस्तदलचारुचामरमंजरी । वनलेखेव विक्षुब्धवरवारणमण्डला ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

कान्तारूपी लताओं के हाथरूपी पल्लवो में सुन्दर चँवररूपी मंजरीवाली वह सभा क्षुब्ध गजराजों के मण्डल से युक्त वन श्रेणी के तुल्य थी यानी जैसे वन श्रेणी में लताओं के पल्लवं मेँ सुन्दर मंजरियाँ सुशोभित होती हैं और उसमें मदोन्मत्त गजराज क्षुब्ध रहते हैं वैसे ही उस सभा में महिलाओं के हाथों में चँवर शोभित थे ओर सभा से उठ रहे लोग ही विक्षुब्ध मत्त गजराज थे