Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 1, Verse 24

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 1, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 1 · श्लोक 24

संस्कृत श्लोक

परस्परांगसंघट्टचूर्णितांगदमण्डली । रत्नपूर्णारुणाम्भोदसन्ध्यासमयसूचनी ॥ २४ ॥

हिन्दी अर्थ

एक के शरीर के दूसरे के शरीर के साथ टकराने के कारण सभा में हजारों बाजू-बन्द चूर-चूर हो गये थे, अतएव वह जहाँ तहाँ रत्नों से भरी हुई थी, इसलिए उस सभा को देखने से लाल मेघों से युक्त सन्ध्या का स्मरण हो जाता था