Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 1, Verse 28
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 1, verse 28 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 1 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
कर्पूरकणनीहाररचितामलवारिदा ।
शरहिक्तटमालेव प्रसृताशेषभूमिका ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
उस सभा ने इधर-उधर उड़ रहे कपूर के चूर्ण से और
उसके सदुश हिम कणों से सफेद मेघ बना रक्खे थे, अतएव वह जिसकी सारी की सारी भूमि हिम, काश
ओर फूल आदि से व्याप्त हो, ऐसा शरतकाल के दिकृतटो की पंक्ति के सदुश थी