Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 1, Verse 25
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 1, verse 25 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 1 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
पतदुत्तंसविभ्रान्तभृंगोपहितघुंघुमा ।
मुकुटोद्दामविद्योतशक्रचापीकृताम्वरा ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
उड़ रहे ओर मालाओं से गुँथे हुए मुकुटों पर मँडरा रहे भँवरों ने
घुंघुम ध्वनि से उस सभा को गुलजार बना रक्खा था और मुकुटों पर भाँति-भाँति के जड़े हुए रत्नों की
प्रभासे उस सभा ने आकाश को इन्द्रधनुष बना डाला था