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Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2) · Sarga 158

18 verse-groups

  1. Verses 1–2एक सौ रूप्पनवाँ सर्गं समाप्त एक सौ सत्तावनवाँ सर्ग सिन्धु के तामसतामस जन्म का वर्णन तथा व…
  2. Verse 3पूछी गई सिन्धु के जीव की प्राक्तन स्थिति का वर्णन करने के लिए ब्रह्म ही उपाधि के संसर्ग स…
  3. Verse 4वह ब्रह्म मेँ चित्‌ हूँ, इसलिए चेतूँ ऐसी संकल्पसंवित्‌ को स्वयं ही प्राप्त होकर समष्टि-व्…
  4. Verse 5वह शरीर (उपाधि) कौन है जिसका त्याग न करता हुआ जीवात्मा को प्राप्त हुआ है ? इस पर उस शरीर…
  5. Verse 6वह चित्त ही परलोक, इहलोक आदि तथा स्वप्न, जाग्रत, जीवन, मरण, भोग, मोक्ष आदि संकल्पो से निर…
  6. Verse 7इस रहस्य का ज्ञान तत्वज्ञानियो को ही हो सकता है, उनसे अन्य को नहीं हो सकता, ऐसा कहते हैँ…
  7. Verses 8–10जैसे आकाश ओर शून्यता दोनों एक ही हैँ वैसे ही जगत्‌ और चित्त दोनों एक ही हैं (अभिन्न ही है…
  8. Verse 11सिन्धु कहेगा : हे महाभाग ! तामस-तामस क्या कहा जाता है ? यह कृपया मुझसे कहिये । परमपद में…
  9. Verses 12–15अपरिच्छिन्न आत्मा की हिरण्यगर्भरूप से माया द्वारा परिच्छिन्नता करने पर हिरण्यगर्भ ही सब स…
  10. Verse 16केवल यही एक संज्ञा नहीं हुई, किन्तु ब्रह्म का जीवभाव होनेपर मित्र उपाधियों के गुणों के अन…
  11. Verse 17मुक्ति की शीघ्रता और विलम्बे प्रयोजक चित्तके गुण और दोषों के कारण ही जीवो के जातिभेदों की…
  12. Verses 18–19हे सम्मानप्रद, कुछ समय तक जन्म के हेतु अज्ञान के रहने पर उसी जन्म में ज्ञान, एश्वर्य आदि…
  13. Verses 20–22पाँच दश जन्म के परवर्ती काल तक उस कल्प में विवेक आदि उत्तम गुणों से रहित जो जाति बहुत से…
  14. Verse 23की कल्पना है उन जातियों मेँ से आप इस तामस-तामसी जाति में उत्पन्न हुए हैं
  15. Verses 24–26महाराज, आपके अनेक जन्म व्यतीत हो चुके हैं | हे वीर, उन विविध विचित्र जन्मों को मैं जानता…
  16. Verse 27सिन्धु कहेगा : यह प्राक्तन अधम तामसतामसी जीवजाति किस उपाय से दवाई जा सकती है । हे आर्य, उ…
  17. Verses 28–31मन्त्री कहेगा : हे महामते, इस त्रिलोकी में ऐसा कोई पदार्थ नहीं है जो उद्वेग रहित (निर्वेद…
  18. Verses 32–36मुनि ने कहा : इसके बाद मन्त्री द्वारा इस प्रकार उक्त वह राजा सिन्धु राज्यभारविहीन बुद्धि…