Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 158, Verse 3

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 158, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 158 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

इति तौ चेरतुस्तत्र तपः शास्त्रविचारणैः । अकारणसुहृद्भूतावुभौ व्याधमहामुनी ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

पूछी गई सिन्धु के जीव की प्राक्तन स्थिति का वर्णन करने के लिए ब्रह्म ही उपाधि के संसर्ग से जीवभाव को प्राप्त होता है यह कहने की इच्छा से आद्य ब्रह्मरूप स्थिति को दिखलाते हैं। आदि-अन्तरहित निर्विकार ब्रह्मशब्दवाच्य मन ओर वचन का अगोचर सत्‌ ही तुम, मैं इत्यादिरूप से स्थित है यानी सर्वात्मा है