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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 158, Verse 7

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 158, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 158 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

ब्रह्मैवमस्त्विति प्रोच्य ययावभिमतां दिशम् । व्याधस्तपःफलं भोक्तुं खगवद्व्योम पुप्लुवे ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

इस रहस्य का ज्ञान तत्वज्ञानियो को ही हो सकता है, उनसे अन्य को नहीं हो सकता, ऐसा कहते हैँ । जैसे तत्वज्ञ लोग ही जो वायु है वही स्पन्दन है यह जानते हे वेसे ही अनाकार चित्त को यह महान्‌ जगत्‌ है, ऐसा जानते हैं