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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 158, Verses 18–19

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 158, verses 18–19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 158 · श्लोक 18,19

संस्कृत श्लोक

मेदिनी मेदिनी जाता शवस्यैतस्य मेदसा । पूरिताऽपूर्वरूपेण हिमवद्गिरिरूपिणा ॥ १८ ॥ तदैवैतन्महामेदो मृद्धातुत्वमुपागतम् । कालेन वसुधा भूयो भूत्वा मृन्मयतां गता ॥ १९ ॥

हिन्दी अर्थ

हे सम्मानप्रद, कुछ समय तक जन्म के हेतु अज्ञान के रहने पर उसी जन्म में ज्ञान, एश्वर्य आदि सुन्दर गुणों से युक्त होकर यदि मुक्ति होती है तो वह जाति की जानकारी रखनेवालो मँ श्रेष्ठ पुरुषों द्वारा केवल सात्विक जाति कही जाती है । जो जाति कल्पादि मेँ नूतन रूपसे प्रकट होकर बहुत जन्मों द्वारा भोगों के भोगनेपर क्रमशः मोक्षभागिनी होती है, जातिज्ञ विद्वान्‌ उस जाति को राजस राजसी जाति कहते हैं