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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 158, Verses 24–26

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 158, verses 24–26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 158 · श्लोक 24-26

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

महाराज, आपके अनेक जन्म व्यतीत हो चुके हैं | हे वीर, उन विविध विचित्र जन्मों को मैं जानता हूँ, आप उन्हें नहीं जानते | इसी भेद से महाशव शरीरवाले तथा असीम आकाशगामी आपने यह समय व्यर्थ बिताया है । इस प्रकार जव आप तामसतामस जन्म से उत्पन्न हुए हैं, तब आपका इस संसाररूपी गर्त से छुटकारा पाना दुर्लभ है