Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1) · Sarga 18
33 verse-groups
- Verse 1सत्रहवाँ सर्गे समाप्त अठारहवाँ सर्ग॑ अपना जन्म कहने के लिए पहले महादेवजी, उनके गण, मातृका…
- Verse 2आम्रवृक्ष की नाई उनके देहार्धं में भ्रमर-पंक्तियों के सदृश नेत्रोवाली तथा उन्नत पुष्प-गुच…
- Verse 3उनके एक गंगारूपी कुसुम - मालिका है, जो हिम और हार की नाई अत्यन्त धवल लहरीरूपी पुष्पों से…
- Verse 4क्षीर-सागर से उत्पन्न हुआ ओर अमृत का झरना बहानेवाला अत्यन्त कान्तियुक्त चन्द्रमा उनका दर्…
- Verse 5निरन्तर मस्तक में स्थित चन्द्रमा के अमृतप्रवाह से जिसकी विषशक्ति निकल गई है ओर जिसमें संज…
- Verse 6जगत के प्रलय में हेतुभूत अपने चक्षुरूपी स्वच्छ अग्नि से उत्पन्न हुई, धूलियों की पंक्तिरूप…
- Verse 7अत्यन्त निर्मल, तेजस्वी चन्द्रमा का भी तिरस्कार कर देनेवाली, मणियों के सदुश सानपर चढाकर व…
- Verse 8सुधाकर चन्द्रमा की सुधाधारा से प्रक्षालित, नीलमेघरूपी पल्लवो से युक्त तथा तारारूपी विन्दु…
- Verse 9चक्कर काट रही लोमड़ियों, परिपक्व नर- मांसों ओर बलि के ओदनो से (भात से) व्याप्त; गाँवों और…
- Verse 10जिसने कपाल-मालाएँ धारण की है, रक्त ओर चर्वी का आसव (मद्य) पान किया है, एवं जो आँतरूपी माल…
- Verse 11क्रमशः तत्-तत् अंगों के भूषण के लिए संचरणशील, सर्वाग से चिकने, प्रस्फुरित हो रही मस्तकम…
- Verse 12दुष्टिपातमात्र से शेलेन्द्र हिमराज को दग्ध कर देनेवाला, जगत का ग्रास करने में लालायित तथा…
- Verse 13महाराज, सत्य- संकल्प होने के कारण उनका अन्तःकरण एकमात्र कल्याण की भावना से ही जगत-समूह को…
- Verse 14तृष्णाओं से शून्य प्रसिद्ध मेरु, हिमालय आदि पर्वत ही उनकी एकाग्रता ध्यान की मूर्तियाँ हैं
- Verse 15अव सर्वोर्गों में समस्त शक्तियों से परिपूर्ण उनके गणों का वर्णन करते हैं। जिनके मस्तक खुर…
- Verse 16तीन नेत्रों के कारण चमक रहे मुखवाले उन महादेवजी के जिस प्रकार सर्वागों मं सर्वविध शक्तियो…
- Verse 17भूतगणो के ऊपर आधिपत्य रखने के कारण उनसे (भूतगणो से) नमस्कृत तथा चौदह भुवनो में उत्पन्न हो…
- Verse 18उन मातृकाओं के मुखो की गदहे ओर ऊँटों के मुखो के सदृश आकृतियाँ है, रक्त, मेद ओर चर्बी उनका…
- Verse 19ये मातृकाएँ पहाड़ों की चोटियों पर, आकाश में, अन्य लोकों में, गर्तों में भी प्राणियों के श…
- Verses 20–21जया, विजया, जयन्ती, अपराजिता, सिद्धा, रक्ता, अलम्बुसा और उत्पला ~ ये आठ मातृदेवियाँ सभी म…
- Verse 22हे मानद मुनिनायक, महामहिमशाली उस मातृगण के बीच में "अलम्बुसा" नामक सातवीं माता अत्यन्त वि…
- Verse 23वैष्णवी-शक्ति के वाहन गरुड की नाई उस “अलम्बुसा-शक्ति” का वाहन कौआ है, यह इन्द्रनील पर्वत…
- Verse 24किसी समय विहारवश भयंकर चेष्टाकारिणी, अष्टसिद्धियों से संपन्न वे सब माताएँ आकाश में इकट्ठी…
- Verses 25–26वाममार्ग में प्रतिपादित पराशक्ति के आराधन- प्रकार में निष्ठा रखनेवाली इन आठ मातृदेवियों न…
- Verse 27वे माताएँ, समस्त जगत के पूज्य तुम्बुरु ओर भैरवनामक देवताओं का पूजन अर्चन कर मदिरामद से सन…
- Verse 28इसलिए महादेवजी को हम लोग अपना वह प्रभाव दिखलाएँ, जिससे कि हम लोगों की महाशक्ति देखकर वे ह…
- Verse 29यों निश्चय कर परस्पर अभिनन्दित उन देवियों ने रूपान्तर में परिणत किये गये मुख आदि अंगोवाली…
- Verses 30–31अनन्तर उन देवियों ने महादेवजी के अंश से माया द्वारा चुराई गई तथा मातृदेवियों के बीच में प…
- Verse 32जिस दिन पार्वतीजी का प्रोक्षण किया, उस दिन वहाँ उन सब देवियों ने नृत्य, गेय आदि से मनोहर…
- Verse 33पर्वत और अरण्यों को शब्दित कर रही कुछ अन्य देवियाँ करताल ओर सिंहनाद के कारण उद्दाम घनीभूत…
- Verse 34जगत-मण्डल की गुहा में मद्यपान से अतितृप्त हुई कुछ मातृकाएँ पर्वत एवं घरों को ध्वनियुक्त ब…
- Verse 35लीला से जनित घुरघुर शब्दों से आकाश के कोने में कुछ देवियाँ मस्तक से लेकर खुरपर्यन्त अंगों…
- Verse 36उनके कुछ उन्मत्त वृत्तान्तो का कथन करते हुए प्रकृत विषय का उपसंहार करते हैं। कुछ देवियाँ…