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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 18, Verse 16

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 18, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 18 · श्लोक 16

संस्कृत श्लोक

तस्य नेत्रत्रयोद्भासिवदनस्यामलप्रभाः । यथा गणास्तथैवान्याः परिवारो हि मातरः ॥ १६ ॥

हिन्दी अर्थ

तीन नेत्रों के कारण चमक रहे मुखवाले उन महादेवजी के जिस प्रकार सर्वागों मं सर्वविध शक्तियों से समन्वित प्रमथगण क्रीडा सहायक परिवार है, उसी प्रकार सर्वागों में सर्वशक्तिसमन्वित निर्मल कान्तिवाली दूसरी-दूसरी नाना प्रकार की आकृति ओर मुखवाली माताएँ भी क्रीडा में सहायक परिवार हैं