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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 18, Verse 27

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 18, verse 27 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 18 · श्लोक 27

संस्कृत श्लोक

अथेयमाययौ तासां कथावसरतः कथा । अस्मानुमापतिर्देवः किं पश्यत्यवहेलया ॥ २७ ॥

हिन्दी अर्थ

वे माताएँ, समस्त जगत के पूज्य तुम्बुरु ओर भैरवनामक देवताओं का पूजन अर्चन कर मदिरामद से सन्तुष्ट होती हुई आपस में चित्र-विचित्र अर्थों से पूर्ण वार्तालाप करने लगीं ॥ २ ६॥ तदनन्तर उनकी कथाओं के प्रसंग से यह एक बात उठी कि भगवान उमापति हम लोगों को क्यों तिरस्कारपूर्वक देखा करते हैं