Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 18, Verses 20–21
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 18, verses 20–21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 18 · श्लोक 20,21
संस्कृत श्लोक
जया च विजया चैव जयन्ती चापराजिता ।
सिद्धा रक्तालम्बुसा च उत्पला चेति देवताः ॥ २० ॥
सर्वासामेव मातॄणामष्टावेतास्तु नायिकाः ।
आसामनुगतास्त्वन्यास्तासामनुगताः पराः ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
जया, विजया, जयन्ती, अपराजिता,
सिद्धा, रक्ता, अलम्बुसा और उत्पला ~ ये आठ मातृदेवियाँ सभी माताओं में मुख्य है । अन्य माताएँ
इन्हीं आठों का अनुगमन करती हैं और उनका अनुगमन करनेवाली अन्य मातृदेवियों का और दूसरी
माताएँ अनुगमन करती हैं