Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 18, Verse 29
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 18, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 18 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
इति निश्चित्य ता देव्यो विवर्णवदनाङ्गिकाम् ।
उमामेव वशीकृत्य प्रोक्षयामासुरादृताः ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
यों निश्चय कर परस्पर अभिनन्दित उन
देवियों ने रूपान्तर में परिणत किये गये मुख आदि अंगोवाली रुद्रशक्ति उमा को अपने अधीन बनाकर,
यज्ञ में पशु की नाई, मन्त्रसहित जल से प्रोक्षित (बलि के संस्कार से युक्त) किया