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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 18, Verses 30–31

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 18, verses 30–31 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 18 · श्लोक 30

संस्कृत श्लोक

माययापहृतां भर्तुरङ्गाद्रङ्गमुपागताम् । तामालोलकचां देव्यः शेपुरोदनतां गताम् ॥ ३० ॥ पार्वतीप्रोक्षणदिने तस्मिंस्तत्र महोत्सवः । बभूव तासां सर्वासां नृत्यगेयमनोहरः ॥ ३१ ॥

हिन्दी अर्थ

अनन्तर उन देवियों ने महादेवजी के अंश से माया द्वारा चुराई गई तथा मातृदेवियों के बीच में प्राप्त हुई चंचल केशवाली उमा को ओदनरूप (सबके भक्ष्य, भोज्य, लेह्य ओर पेयरूप) बनाने के लिए मानों अभिशाप दिया