Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 18, Verse 18
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 18, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 18 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
खरोष्ट्राकारवदना रक्तमेदोवसासवाः ।
दिगन्तरविहारिण्यः शरीरावयवस्रजः ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
उन मातृकाओं के मुखो की गदहे ओर ऊँटों के मुखो के सदृश आकृतियाँ है, रक्त, मेद
ओर चर्बी उनका आसव के सदृश सर्वदा पेयपदार्थ है । चारों दिशाओं में वे विहार करती हैं और शव के
हाथ, पैर आदि की मालाएँ पहनती हैं