Sthiti Prakarana (Existence) · Sarga 25
चौबीसवाँ सर्ग समाप्त प्रचीसवाँ सर्ग देवताओं द्वारा शम्बर के सेनापतियों की हत्या; दाम, व्याल ओर कट नामक सेनापतियों की उत्पत्ति ओर उनसे देवताओं पर विजय पाने की आशा का वर्णन |
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- Verses 1–2वासनारहित पुरुष में भी धीरे धीरे वासनाओं का संचय होने से देहादि का अभिमान होने पर जन्म-मर…
- Verses 3–5भवताप को दूर करनेवाली अपनी उदार वाणी से शुद्ध तत्त्व का बोध मुझे कराइये
- Verse 6श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामचन्द्रजी, दाम - व्याल- कट न्याय को और भीम-भास दृढ़ स्थिति…
- Verse 7सम्पूर्ण आश्चर्य वस्तुओं से मनोहर पातालगर्त में शम्बर नामक दैत्यराज था । उसे मायारूपी मणि…
- Verses 8–10उसने आकाश में कल्पित नगरों के उद्यानों में राक्षसों से मन्दिर बना रक्खे थे, बनावटी उत्तम…
- Verses 11–18खिले हुए नील कमल की राशियों से उसने अपने क्रीड़ा के घर को कामियों के लिए भयंकर बना दिया थ…
- Verses 19–21वह सकल सम्पत्तियों से महासौभाग्यशाली था और ऐश्वर्य उसे प्रणाम करते थे उसके उग्र शासन को स…
- Verse 22मायाबलवाले उस दैत्य के सो जाने पर और देशान्तर चले जाने पर अवसर पाकर देवताओं ने उसकी सेना…
- Verse 23देवताओं के द्वारा उसकी सेना का विनाश होने पर शम्बरासुर ने मुण्डी, क्रोध, द्रम आदि सेनापति…
- Verse 24भयानक देवताओं ने अवसर पाकर जैसे आकाश में स्थित बाज पक्षी व्याकुल हुई गौरैयों को मार डालता…
- Verse 25असुर श्रेष्ठ शम्बर ने जैसे सागर चंचल और उग्र शब्द करनेवाली तरंगों की सृष्टि करता है, वैसे…
- Verse 26देवताओं ने उन्हें भी जल्दी ही मार डाला, इससे उसके कोप की सीमा न रही । वह देवताओं से भरे ह…
- Verse 27शम्बरासुर की माया से भयभीत हुए देवता देवीजी के वाहन सिंह से भयभीत हुए मृगों की नाई स्वर्ग…
- Verse 28शम्बरासुर ने स्वर्ग में जाकर स्वर्ग को, जिसमें क्षुद्र-क्षुद्र देवगण रो रहे थे और अप्सराओ…
- Verses 29–30करुद्ध हुए शम्बरासुर ने वहाँ पर इधर-उधर भ्रमण किया, जो रत्न आदि सुन्दर वस्तुएँ थी, उन्हे…
- Verse 31इस प्रकार देवता ओर दानवं के मनोमालिन्य के दृढ़ होने पर देवता स्वर्ग का परित्याग कर इधर-उध…
- Verse 32देवता बराबर तब तक ऐसा करते जब तक कि कुपित शम्बरासुर अत्यन्त उद्वेग को प्राप्त होकर तृणाग्…
- Verse 33जैसे पापी पुरुष निधि को नहीं पा सकता, वैसे ही बड़े प्रयत्न से तीनों लोकों को खोजकर भी वह…
- Verse 34फिर तो उसने अपनी सेना की रक्षा के लिए मूर्तिमान तीन कालों की तरह उदित हुए महाबली बड़े भीष…
- Verse 35माया से बने हुए अतएव बड़े मायावी, बलरूपी वृक्षों को धारण करनेवाले वे भयंकर सेनापति अपने प…
- Verses 36–37दाम (शत्रुओं का दमन करनेवाला), व्याल (साँप की तरह शत्रुओं को लपेटनेवाला) ओर कट (शत्रुओं क…
- Verse 38प्राक्तन कर्मो का अभाव होने से वे प्राक्तन (पूर्वसिद्ध जीव) न थे ओर न उनकी वासनाएँ थी, वे…
- Verse 39वासनाशून्य वे योद्धा काकतालीय न्याय की तरह अन्धपरम्परा से ही प्रस्तुत क्रिया का अनुवर्तन…
- Verse 40यदि किये, जिनकी वासना उद्भूत नहीं हुई, उनका व्यवहार कहाँ देखा गया है, तो सुनिये, एसा कहते…
- Verses 41–42न तो वे युद्ध के समय शत्रुओं के अभिमुख आगमन को जानते थे, न विश्रान्त और नि:शंक शत्रुओं के…
- Verse 43यदि नहीं जानते थे, तो स्वयं शत्रुओं के ऊपर आक्रमण कैसे करते थे ? इस पर कहते हैं। अपने प्र…
- Verse 44अत्यन्त बलशाली असुरों के बाहुरूपी वृक्षों से सुरक्षित मेरी यह सेना शत्रु का प्रहार होने प…