Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 25, Verse 32
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 25, verse 32 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 25 · श्लोक 32
संस्कृत श्लोक
यावदुद्बेगमायातः शम्बरः कोपवान्भृशम् ।
तार्णोऽतिमात्रमनल इव जज्वाल सोच्छ्वसन् ॥ ३२ ॥
हिन्दी अर्थ
देवता बराबर तब तक ऐसा करते जब तक कि कुपित शम्बरासुर अत्यन्त उद्वेग को
प्राप्त होकर तृणाग्नि के समान उच्छवास लेता हुआ अत्यन्त प्रज्वलित नहीं हुआ