Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 25, Verse 28
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 25, verse 28 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 25 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
क्रन्दत्क्षुद्रामरगणं वाष्पक्लिन्नाप्सरोमुखम् ।
शून्यं ददर्श स स्वर्गं कल्पक्षीणजगत्समम् ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
शम्बरासुर ने स्वर्ग में जाकर स्वर्ग को, जिसमें क्षुद्र-क्षुद्र देवगण रो रहे थे और अप्सराओं के
मुखमण्डल आँसुओं से लथपथ थे, प्रलयकाल में नष्ट-भ्रष्ट हुए जगत के तुल्य शून्य देखा