Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 25, Verses 11–18

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 25, verses 11–18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 25 · श्लोक 11-18

संस्कृत श्लोक

फुल्लनीलोत्पलव्यूहकरालरमणालयः । रत्नहंसध्वनाहूतहेमाम्बुरुहसारसः ॥ ११ ॥ हेमपादपशाखाग्रकृताम्भोरुहकुड्मलः । करञ्जजालप्रपतन्मन्दारकुसुमाकरः ॥ १२ ॥ तर्कुयन्त्रमयानन्तदैत्यनिर्जितवासवः । हिमशीतानलज्वालानिर्मितोद्यानमण्डपः ॥ १३ ॥ सर्वत्र कुसुमोद्यानजितानन्दननन्दनः । मायासर्वहृतव्यालमलयाचलचन्दनः ॥ १४ ॥ हेमश्रीलोकलावण्यनिर्जितान्तःपुराङ्गनः । नानाकुसुमसंभारजानुदघ्नगृहाङ्गणः ॥ १५ ॥ क्रीडार्थमृन्मयेशानजितचक्रगदाधरः । अजस्रोड्डीनरत्नौघताराढ्यखपुरान्तरः ॥ १६ ॥ निशीथाखिलपातालशतचन्द्रनभस्तलः । स्वशालभञ्जिकालोकगीतगीतिरणोत्कटः ॥ १७ ॥ मायैरावणनागेन्द्रविद्रुतामरवारणः । त्रैलोक्यविभवोत्कर्षपूरितान्तःपुरान्तरः ॥ १८ ॥

हिन्दी अर्थ

खिले हुए नील कमल की राशियों से उसने अपने क्रीड़ा के घर को कामियों के लिए भयंकर बना दिया था। रत्नभूत हंसों की ध्वनि से स्वर्णकमल के सारसों का आह्वान किया था। स्वर्णवृक्षों की शाखाओं के अग्रभागमें कमल की कलियाँ गुथ रक्ी थी। कुजो के वृक्षों के ऊपर से मन्दार के फूल गिरते थे । कैंची के तुल्य अनन्त दैत्यों से उसने इन्द्र पर विजय प्राप्त की था। बर्फ के समान ठंडी अग्नि की ज्वालाओं से उसने अपना उद्यानमण्डप बना रक्खा था, सर्वज्ञ बने हुए फूलों के बगीचों से आनन्ददायी नन्दनवन को उसने जीत लिया था। वह अपनी माया से मलयाचल के सब चन्दन के वृक्षों को साँपों के साथ हर लाया था। उसके अन्तःपुर की अंगनाएँ स्वर्णं की कान्ति और सब लोगों की सुन्दरता को नीचा दिखानेवाली थी । विविध पुष्पों की राशियों से उसके घर का आँगन घुटनों तक भरा था | क्रीडा के लिए बनाये गये मिट्टी के शंकरजी ने भगवान श्रीकृष्ण को जीत लिया था। सदा ऊपर को छिटक रही जुगनू की तरह घूम रही रत्नराशियों की प्रभा रूपी तारों से उसके नगर का मध्यभाग भरपूर था। सब रात्रियों में सारे पाताल में आकाश सौ चन्द्रमाओं से युक्त रहता था। उसका युद्ध पराक्रम ऐसा था कि उससे रचे गये प्रतिमारूपी लोग उसके प्रबन्ध का गुणगान करते थे। माया से रचित ऐरावत आदि गजराजों से देवताओं के ऐरावत आदि का उसने मानमर्दन कर दिया था। तीनों लोकों मे स्त्री, हाथी, घोड़े आदि में सर्वोत्कृष्ट र॒त्नरूप स्त्रीरत्न आदि से उसने अन्तःपुर को परिपूर्ण कर दिया था