Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 25, Verses 41–42
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 25, verses 41–42 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 25 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
नाभिपातं न चापातं न विदुस्ते पलायनम् ।
न जीवितं न मरणं न रणं न जयाजयौ ।। ४१
केवलं सैनिकानग्रे दृष्टानाहननोद्यतान् ।
अभिजग्मुः परानाजौ प्रहारदलिताद्रयः ।। ४२
हिन्दी अर्थ
न तो वे युद्ध के समय शत्रुओं के अभिमुख आगमन
को जानते थे, न विश्रान्त और नि:शंक शत्रुओं के अकस्मात आक्रमण को जानते थे, न भागना ही जानते
थे, न जीवन जानते थे, न मरण जानते थे, न युद्ध जानते थे और न जय-पराजय जानते थे