Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 25, Verse 43
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 25, verse 43 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 25 · श्लोक 43
संस्कृत श्लोक
शम्बरश्चिन्तयामास परितुष्टमनाः परम् ।
विजेष्यते हि मे सेना मायासुरसुरक्षिता ।। ४३
हिन्दी अर्थ
यदि नहीं जानते थे, तो स्वयं शत्रुओं के ऊपर आक्रमण कैसे करते थे ? इस पर कहते हैं।
अपने प्रहार से पर्वतों को चूर-चूर करनेवाले वे शस्त्र प्रहार करने के लिए उद्यत अपने आगे देखे
गये शत्रुसैनिकों पर केवल आक्रमण करते थे। भाव यह है कि जाकर प्रहार करना चाहिए। इस प्रकार की
शम्बरासुर की वासना ही उनका शरीर था। सामने शत्रु को देखने से उतना ही उनको ज्ञात होता था,
इसलिए वे आक्रमण करते थे ॥४ २॥शम्बरासुर ने अत्यन्त प्रसन्न होकर ऐसा विचार किया कि माया से
निर्मित दाम आदि असुरों से सुरक्षित मेरी सेना अवश्य शत्रुओं पर विजयी होगी