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Vairagya Prakarana (Dispassion) · Sarga 8

सातवाँ सर्ग समाप्त आठवाँ सर्ग राजा का श्रीरामचन्द्रजी मेँ अधिक स्नेह होने के कारण उनमें युद्ध की अयोग्यता का वर्णन तथा रावण आदि के बल को जानकर राजा के विषाद का वर्णन |

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  1. Verse 1वाल्मीकिजी ने कहा : भरद्वाज, राजश्रेष्ठ दशरथ विश्वामित्रजी के उक्त वचन सुनकर एक क्षण के ल…
  2. Verse 2मुनिवर, कमलनयन श्रीराम अभी पूरे सोलह वर्ष का भी नहीं हुआ मैं इसमें राक्षसां के साथ युद्ध…
  3. Verse 3प्रभो, यह मेरी पूर्ण एक अक्षौहिणी सेना है, जिसका मैं अधीश्वर हूँ । उसको लेकर मैं ही राक्ष…
  4. Verses 4–5ये सभी सैनिक शूर, वीर, पराक्रमशाली और परामर्श देने में दक्ष हैं । मैं समरभूमि में धनुष, ब…
  5. Verses 6–12श्रीराम बालक है, युद्ध से नितान्त अनभिज्ञ है और सेना का बलाबल नहीं जानता । इसने अन्तःपुर…
  6. Verse 13शरीर से इतना सुकुमार, अवस्था से बालक मेरा बच्चा है । उस पर उसे मानसिक पीडा ने जकड रखा हे…
  7. Verses 14–15यदि कहें कि आप तो धर्मलिप्यु हैं, आपको धर्मविरोधी पुत्रस्नेह से क्या प्रयोजन है ? इस पर क…
  8. Verse 16मुनिश्रेष्ठ, मनुष्य प्राण, धन-सम्पत्ति ओर स्त्रियो को छोड सकते हैं, मगर पुत्र को नहीं छोड…
  9. Verse 17राक्षस बड़े क्रूर कार्य करनेवाले ओर कूट युद्ध में दक्ष हैं । श्रीरामचन्द्र उनके साथ युद्ध…
  10. Verse 18मुनिवर, मैं जीने की इच्छा करता हूँ, लेकिन रामचन्द्र से क्षणभर के लिए भी वियुक्त होकर मैं…
  11. Verse 19भगवन्‌, मुझे उत्पन्न हुए नौ हजार वर्षो तक पुत्र की कामना सताती रही, तदुपरान्त बड़े कष्ट स…
  12. Verses 20–21इन चारों मेँ कमलनयन राम सर्वप्रधान है, उसके बिना उसके तीन भाई भी नहीं जी सकेंगे जिसको ले…
  13. Verse 22चार पुत्रों मँ से रामचन्द्र के ऊपर ही मेरा सर्वाधिक प्रेम हे, क्योकि वह सर्वज्येष्ठ ओर धर…
  14. Verses 23–24मुने, यदि आपको राक्षसो की सेना का संहार करने की इच्छा हो, तो मेरे साथ मेरी चतुरंगिणी सेना…
  15. Verses 25–26उक्त राक्षसो में कितना बल है, वे किसके पुत्र हैं, कैसे रहते हैं, कितने है ओर उनके नाम क्य…
  16. Verses 27–28साक्षात्‌ कुबेर का भाई मुनि विश्रवा का पुत्र महावलशाली रावणनामक राक्षस सुना जाता हे । वह…
  17. Verse 29ब्रह्मन्‌, किसी समय किसी समुदाय में विपुल बल और सम्पत्ति से सम्पन्न पुरुष भूतों में उदय क…
  18. Verse 30इस समय तो हम लोग रावण आदि शत्रुओं के सामने खड़े होने में सर्वथा असमर्थ हैं, यह ईश्वरीय नि…
  19. Verse 31इसलिए हे धर्मज्ञ, अनुकम्पनीय मेरे पुत्र पर अनुग्रह किजिये ओर प्रार्थी के मनोरथ को पूर्ण न…
  20. Verses 32–34आपको ऐसा अधैर्य केसे हुआ ? इस प्रश्न पर कहते हैं। देवता, दैत्य, गन्धर्व, यक्ष, पक्षी, नाग…
  21. Verses 35–36जिस समय मान्धाता आदि राजाओं ने जन्म लिया था, यह काल वैसा नहीं है । इस समय में सज्जन ही नि…
  22. Verses 37–38अथवा यदि यम के सदृश सुन्द और उपसुन्द के पुत्र (मारीच ओर सुबाहु) आपके यज्ञ के विघ्वंसक हैं…