Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 8, Verses 4–5
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 8, verses 4–5 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 8 · श्लोक 4,5
संस्कृत श्लोक
इमे हि शूरा विक्रान्ता भृत्या मन्त्रविशारदाः ।
अहं चैषां धनुष्पाणिर्गोप्ता समरमूर्धनि ॥ ४ ॥
एभिः सहैव वीराणां महेन्द्रमहतामपि ।
ददामि युद्धं मत्तानां करिणामिव केसरी ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
ये सभी सैनिक शूर, वीर, पराक्रमशाली और परामर्श देने में दक्ष हैं ।
मैं समरभूमि में धनुष, बाण लेकर समस्त सैनिकों की रक्षा करूँगा। जैसे सिंह मत्त हाथियों के साथ युद्ध
करता है, वैसे ही इन शूर-वीर सैनिकों के साथ मैं महेन्द्र से बलिष्ट वीरों से भी युद्ध कर सकता
हूँ