Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 8, Verses 25–26
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 8, verses 25–26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 8 · श्लोक 25,26
संस्कृत श्लोक
कथं तेन प्रकर्तव्यं तेषां रामेण रक्षसाम् ।
मामकैर्बालकैर्ब्रह्मन्मया वा कूटयोधिनाम् ॥ २५ ॥
सर्वं मे शंस भगवन्यथा तेषां महारणे ।
स्थातव्यं दुष्टभाग्यानां वीर्योत्सिक्ता हि राक्षसाः ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
उक्त राक्षसो में कितना बल है, वे किसके पुत्र हैं, कैसे रहते हैं, कितने है ओर उनके नाम क्या है ?
यह सव स्पष्टरूप से मुझे सुनाइये ।
हे ब्रह्मन्, मुञ्चे या शिशु राम को अथवा मेरे चारों बालकों को कूटयुद्ध में विशारद उन राक्षसो का
प्रतीकार कैसे करना चाहिये और उन दुरात्मा राक्षसों के साथ महारण में केसे रहना चाहिए, यह भी
मुझसे कहिये । ये राक्षस बड़े बलगर्वित हैँ