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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 8, Verse 1

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 8, verse 1 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 8 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

अष्टमः सर्गः वाल्मीकिरुवाच । तच्छ्रुत्वा राजशार्दूलो विश्वामित्रस्य भाषितम् । मुहूर्तमासीन्निश्चेष्टः सदैन्यं चेदमब्रवीत् ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

वाल्मीकिजी ने कहा : भरद्वाज, राजश्रेष्ठ दशरथ विश्वामित्रजी के उक्त वचन सुनकर एक क्षण के लिए चित्रलिखित की नाई निश्चेष्ट हो गये ओर तदनन्तर दीन वचन कहने लगे

सर्ग सन्दर्भ

सातवाँ सर्ग समाप्त आठवाँ सर्ग राजा का श्रीरामचन्द्रजी मेँ अधिक स्नेह होने के कारण उनमें युद्ध की अयोग्यता का वर्णन तथा रावण आदि के बल को जानकर राजा के विषाद का वर्णन |