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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 8, Verses 27–28

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 8, verses 27–28 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 8 · श्लोक 27,28

संस्कृत श्लोक

श्रूयते हि महावीर्यो रावणो नाम राक्षसः । साक्षाद्वैश्रवणभ्राता पुत्रो विश्रवसो मुनेः ॥ २७ ॥ स चेत्तव मखे विघ्नं करोति किल दुर्मतिः । तत्संग्रामे न शक्ताः स्मो वयं तस्य दुरात्मनः ॥ २८ ॥

हिन्दी अर्थ

साक्षात्‌ कुबेर का भाई मुनि विश्रवा का पुत्र महावलशाली रावणनामक राक्षस सुना जाता हे । वह दुर्बुद्धि यदि आपके यज्ञ मेँ विघ्न करता है, तो हम उस दुष्टात्मा के साथ युद्ध करने में समर्थ नहीं हे