Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 8, Verse 16
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 8, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 8 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
असवोऽथ धनं दारास्त्यज्यन्ते मानवैः सुखम् ।
न पुत्रो मुनिशार्दूल स्वभावो ह्येष जन्तुषु ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
मुनिश्रेष्ठ, मनुष्य प्राण, धन-सम्पत्ति ओर स्त्रियो को छोड सकते हैं, मगर पुत्र को नहीं
छोड सकते, यह प्राणियों का स्वभाव है