Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2) · Sarga 201
17 verse-groups
- Verses 1–14से पूर्ण रन्प्रवाले कीचकं की (एक प्रकार के बाँसों की) ध्वनि के समान मधुर थी । सनकादि सिद्…
- Verses 15–17प्रचुर भांकार से भासुर, देववृन्द ओर चारणो से परिवृत्त, पुष्पराशि से विभूषित, परिपूर्णं उत…
- Verses 18–29सिद्धो ने कहा : सिद्ध पुरुषों के बीच में कल्पपर्यन्त हजारों बार मोक्षोपायों का हमने खूब व…
- Verse 30राजा दशरथ ने कहा : हे गुरुवर, आपके सदुपदेश से प्राप्त क्षयबुद्धिविहीन बोधमय निरतिशयानन्दर…
- Verses 31–32हे गुरुवर, यद्यपि इस प्रकार के निरतिशय परम पुरुषार्थ को प्रदान करनेवाले पूजनीय आपके पूजनय…
- Verses 33–34दोनों लोकों में यानी स्वर्ग ओर भूतल में भोग के लिए जिसका मेने संचय किया है उस सुकृत से, प…
- Verses 35–36श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे भूपते, हम ब्राह्मण लोग केवल प्रणाम से सन्तुष्ट है | केवल प्रणाम…
- Verse 37दशरथजी ने कहा : हे ब्रह्मन्, इस परम पुरुषार्थरूप मोक्ष के प्रदानरूप महान् उपकार के लिए…
- Verses 38–52श्रीवाल्मीकिजी ने कहा : महाराज दशरथ के यह कह चुकने के वाद गुरु के चरणों पर पुष्पांजलि अर्…
- Verses 53–54सभ्य लोगों ने कहा : हे ब्रह्मन्, एकमात्र परमार्थ तत्त्व से सुशोभित होनेवाले श्रीवसिष्ठजी…
- Verses 55–56हे विभो, जसे कुमुद ब्रह्मसदृश आकाश में विस्तारित तथा परमामृत से शीतल चन्द्रमा की दीप्ति स…
- Verses 57–58श्रीवाल्मीकिजी ने कहा : हे मुने, मुनिश्रेष्ठ वसिष्ठजी से यह कहकर मेघ के सदृश गम्भीर शब्द…
- Verse 59मुनिजनों ने इसी प्रकार राजा दशरथ की प्रशंसा की । इसके उपरान्त श्रीरामचन्द्रजी का विष्णु क…
- Verse 60सिद्धो ने कहा : चार स्वरूपवाले दूसरे नारायण के तुल्य स्थित भ्राता सहित श्रीरामचन्द्रजीरूप…
- Verses 61–64सिद्धो ने चतुःसागरपर्यन्त भूमिमण्डल के पालक, भूत, भविष्यत् ओर वर्तमान काल मेँ कभी विलय न…
- Verse 65उसी प्रकार आकाशस्थ सिद्ध पुरुषों ने श्रीवसिष्ठजी की प्रशंसा की, सभास्थित पुरुषों ने भी उन…
- Verse 66आकाश स्थित महर्षि तथा देवताओं ने, भूमि में स्थित ब्राह्मणों तथा राजाओं ने तथा पृथिवी ओर आ…