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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 201, Verses 61–64

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 201, verses 61–64 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 201 · श्लोक 61-64

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

सिद्धो ने चतुःसागरपर्यन्त भूमिमण्डल के पालक, भूत, भविष्यत्‌ ओर वर्तमान काल मेँ कभी विलय न होनेवाले राजचिहों से युक्त महाराज दशरथ की आप रामसदृश पुत्र के पिता होने से अत्यन्त धन्य हैं यों प्रशंसा की तथा मुनिसंघ के स्वामी भूरितेजस्वी अतएव भगवान्‌ सूर्य के समान स्थित मुनिवर श्रीवसिष्ठजी की तथा महायशस्वी तपोनिधि श्रीविश्वामित्र की प्रशंसा की ओर कहा इन्हीं के महान्‌ प्रभाव से हम सब लोग भ्रान्ति को दूर करनेवाली उत्तम ज्ञानप्रदान करनेवाली वसिष्ठजी की यह वाणी सुन पाये हैं । वाल्मीकिजी ने कहा : ऐसा कहकर सिद्धो ने फिर आकाश से फूलों की वर्षा की तथा सभास्थान में प्रसन्नचित्त होकर चुपचाप बैठ गये