Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 201, Verse 59
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 201, verse 59 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 201 · श्लोक 59
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
मुनिजनों ने इसी प्रकार राजा दशरथ की प्रशंसा की ।
इसके उपरान्त श्रीरामचन्द्रजी का विष्णु के अवतारत्वरूप वृत्त जाननेवाले उन लोगों ने चाररूपवाले
भगवान् श्रीहरिरूप श्रीरामचन्द्रजी की प्रशंसा की