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Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2) · Sarga 168

19 verse-groups

  1. Verse 1एक सौ छासठवाँ सर्गं समाप्त एक सौ सड़सठवाँ सर्ग विभिन्न वादियों की उक्त चार ख्यातियों का त…
  2. Verse 2यदि जगत्ख्याति होती तो वह आत्मख्याति है या असत्ख्याति है या अख्याति है इत्यादि विकल्पों क…
  3. Verse 3ये आत्मख्याति आदि भ्रान्तिदृष्टियाँ चिन्मात्र से उदित होती हैं ओर चिन्मात्र परमार्थरूप से…
  4. Verse 4यह आत्मा है, यह ख्याति है, यह अन्तःकरण की कल्पनाभ्रान्ति ही हे, अतः इसका संभव नहीं हे । इ…
  5. Verse 5इस परमार्थदर्शन से चल रहा, ठहर रहा और खा रहा सारा जगत्‌ शान्त, आकाश के समान मौन, निर्मल,…
  6. Verse 6उक्त अर्थ का विशदरूपसे प्रतिपादन करते हैं। उक्त परमार्थदर्शन से नाना महाशब्दो से भरा हुआ…
  7. Verse 7भाँति-भाँति के अनेक आरम्भो से (कर्मो से) पूर्ण भी यह महाशून्य तथा अनाकृत है । पंचभूतात्मक…
  8. Verses 8–10विविध पदार्थों से परिपूर्ण भी यह शून्य संवेदनमात्र है । स्वप्न में देखे गये महासागर के सम…
  9. Verse 11श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : मुनिवर, यदि अविद्यमान ही जाग्रत्‌ ओर स्वप्नरूप जगत्‌ केवल वासना…
  10. Verses 12–17जाग्रत-स्वप्न जगत्‌ के अविद्या, निद्रा आदि दोष जनित होने के कारण तथा स्वप्रकाश चेतन में स…
  11. Verse 18तब किसकी यह भ्रान्ति है ओर किसने ये जगत्‌ आदि नाम किये हैं 2 इसपर कहते है । इस प्रकार अपन…
  12. Verses 19–21अथवा चित्‌ में कदापि स्वप्न न होने से यह सब कुछ सदा ही जाग्रदरूप है या केवल भ्रान्तिमात्र…
  13. Verses 22–34कल्पनावेदनदरष्टि से जिसने जब जैसा जाना उसको तब यह ऐसा ही है, यो सन्तोष करना चाहिये, ऐसा क…
  14. Verses 35–39संवित्‌घन चिदाकाश की मज्जाभूत संवित्‌ यद्यपि नित्य ही उदित है तथापि जब-जब जैसे उदित होती…
  15. Verse 40चिदाकाश जैसे जैसे वासना के उद्भव से स्फुरित होता हे वैसे वैसे यह जगत्रूप से भासित होता है…
  16. Verses 41–42इसलिए जिस प्रकार इस जगत्‌ का भान होता हे वैसा ही भान हो । भान होनेपर भी वह चिदाकाशरूप होन…
  17. Verses 43–44यथास्थित यह जगत्‌ ऐसा हे ओर ऐसा नहीं है, सत्‌ है अथवा असत्‌ हे इस लोकपर्यायवृत्तान्त को त…
  18. Verse 45जब तक विचार करना हो तव तक लोकनीति के अनुसार वाच्यवाचकभाव, वाहे वह असत्‌ ही क्यो न हो, स्व…
  19. Verses 46–60इसलिए सम्यक्‌ विचार से निर्मल हुई बुद्धि से अन्दर संकल्पकरणरूप प्रचुर विकल्पों को हटाकर म…