Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 168, Verse 4
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 168, verse 4 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 168 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
अबुद्धिपूर्वमारम्भो दृश्यरूपः स्वतश्चितेः ।
संकल्प्यमानो बुद्ध्यादिस्तरङ्गादिर्यथाम्बुधेः ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
यह आत्मा है, यह ख्याति
है, यह अन्तःकरण की कल्पनाभ्रान्ति ही हे, अतः इसका संभव नहीं हे । इसलिए शब्द का त्यागकर आप
परमार्थभाजन होइए | इसीलिए हमने 'सार्थकेना55त्मशब्देन ख्यातिशब्देन चोज्डिताम् यानी सार्थक
आत्मशब्द से और ख्यातिशब्द से परित्यक्त (विरहित) ऐसा कहा हे