Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1) · Sarga 90
नवासीवाँ सर्ग समाप्त नब्बेवाँ सर्ग कुम्भरूपिणी चूडाला द्वारा चिन्तामणि और कोच के सुन्दर आख्यान का विस्तार से तात्पर्यवर्णन ।
15 verse-groups
- Verses 1–2राजा शिखिध्वज ने कहा : हे देवपुत्र, चिन्तामणि के साधक तथा विन्ध्याचल के हाथी के बन्धन आदि…
- Verse 3उन कथाओं में सर्वप्रथम “अस्ति कश्चित पुमान् श्रीमान्“ (कोई एक श्रीमान् पुरुष था) इत्या…
- Verse 4"कलावान् शास्त्रकुशलः ' इत्यादि जो कुछ लक्षण मैंने कहे हैं, वे सब आपमें घटते हैं। जिस तर…
- Verse 5भला बतलाइये तो सही, वह चिन्तामणि कौन है, जिसके साधन में मैं प्रवृत्त हँ, उसे कहते हैं। हे…
- Verse 6सर्वत्याग मे चिन्तामणित्व का उपपादन करते है । हे निष्पाप राजन्, शुद्ध सर्वत्याग से ही सब…
- Verse 7हे साधो, साधना करते हुए आपका वह सर्वपरित्याग सिद्ध हो चुका है, जो जगत् के प्रसिद्ध एेश्व…
- Verse 8कैसे सिद्ध हो गया, यह कहते है । आपने स्त्री, धन और बन्धुओं के साथ-साथ अपने सम्पूर्णं राज्…
- Verses 9–10स्वदेश से बहुत दूर में स्थित आप मेरे आश्रम में विश्रान्ति के लिए ऐसे आ गये हैँ, जैसे कच्छ…
- Verse 11अहंकार का परित्याग हो जाने पर अवशिष्ट रहा पूणनिन्दस्वरूप परमयुरुषार्थ अपने-आप हृद्य में स…
- Verse 12विकल्पवश के ही कारण तो सर्वत्याग होने पर भी आपको अभी तक अविश्वास बना हुआ है कि यह सर्वत्य…
- Verses 13–14इस चिन्ता से संकल्पग्रहण के वृद्धिगत हो जाने पर आपका वह सर्वत्याग उड़कर कहीं उस तरह चला ग…
- Verses 15–17उस पुरुष का त्याग भला कैसे सिद्ध हो सकता है, जो चिन्ता को तनिक भी अपनाता है। पवन के स्पन्…
- Verse 18उड़कर भाग रहा त्याग सर्वत्याग के फ़ल निश्विन्तता को लेकर मानो चला गया, यह उत्प्रेक्षा करत…
- Verses 19–26अभी तक आपने स्फटिक का एक टुकड़ा भी नहीं पाया
- Verse 27पूर्वोक्त चिन्तामणि के साधक के चरित्र की समता का उपसंहार करते है। हे पद्मनेत्र महीपते, इस…