Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 90, Verse 6
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 90, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 90 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
सर्वत्यागेन शुद्धेन सर्वमासाद्यतेऽनघ ।
सर्वत्यागो हि साम्राज्यं किं चिन्तामणितो भवेत् ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
सर्वत्याग मे चिन्तामणित्व का उपपादन करते है ।
हे निष्पाप राजन्, शुद्ध सर्वत्याग से ही सब कुछ प्राप्त किया जा सकता है, क्योकि सर्वत्याग ही
साग्राज्य-आत्यन्तिक पूर्णकामता है । चिन्तामणि से क्या होता है ?