Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 90, Verse 12
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 90, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 90 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
नायं स परमानन्दः सर्वत्यागो महोदयः ।
कोऽप्युच्चैरन्य एवासौ चिरसाध्यो महानिति ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
विकल्पवश के ही कारण तो सर्वत्याग होने
पर भी आपको अभी तक अविश्वास बना हुआ है कि यह सर्वत्याग प्रसिद्ध महोदय स्वरूप ओर
परमानन्दस्वरूप नहीं है । महान् तो कोई बहुत उन्नत चिरकालसाध्य अन्य ही है