Upashama Prakarana (Dissolution) · Sarga 65
चौसठवाँ सर्ग समाप्त पैंसठवाँ सर्ग सह्याद्वि पर्वत का, वहाँ स्थित अत्रि ऋषि के आश्रम का तथा महर्षि अत्रि के आश्रम मे स्थित विलास और भास नाम के दो तपस्वियों के जन्म, कर्म और शोक का वर्णन ।
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- Verses 1–2आत्मदर्शन के उपायों की उपेक्षा करने पर शोक, मोह आदि दुःखो की परम्परा हट नहीं सकती, इस विष…
- Verse 3जल के तरगों की क्रीड़ाओं की हेतु, मेघो से ओर तज्जनित नील अन्धकारो से श्याम तथा दुःख- कारण…
- Verse 4इसी विषय में सह्याद्रि के शिखर पर रहनेवाले भास ओर विलास नाम के दो विशुद्धात्मा मित्रों के…
- Verses 5–10से युक्त सुवर्णमय नितम्ब देश से वह गण्डस्थल से एरावत की नाई बड़ा भला लगता है । उस पर्वत प…
- Verses 11–13उस पर्वत की गुहाएँ विद्याधरों से आश्रित हैं, जिनमें भँवरों के मधुर गीत हो रहे हैं, ऐसे कम…
- Verses 14–15उस पर्वत का शरीर नीचे गिरे हुए पुष्परूपी अभ्रों से आच्छादित, तत्क्षण गिरे हुए पुष्पों का…
- Verse 16उप पर्वत में जिन्होंने मेघरूपी नील वस्त्रों का परिधान किया है ओर मूक रत्नों को धारण करने…
- Verses 17–20उस पर्वत में उत्तर किनारे के शिखर पर जहाँ फलों से लदे विनम्र वृक्ष है, रत्नमयी अनेक बावड़…
- Verse 21उस बड़े विस्तीर्ण आश्रम में आकाशमार्ग में रहनेवाले बृहस्पति और शुक्र की नाई शास्त्रों को…
- Verse 22किसी समय की बात है वहाँ पर एक ही आश्रम में रहनेवाले उन दोनों तपस्तियों के विशुद्ध स्वरूपव…
- Verse 23उनके नाम थे - विलास और भास । पिताओं के स्थान में ही वे दोनों क्रमशः लता और वृक्ष के दीर्घ…
- Verse 24वे दोनों एक दूसरे के प्रति अत्यन्त स्नेह रखते थे, परस्पर प्यार करते थे ओर मित्र थे। जैसे…
- Verse 25जैसे पुत्र के लिए मिले हुए अनुरक्त पति-पत्नी एक दूसरे से अलग नहीं होते, वैसे ही वे दोनों…
- Verse 26अत्यन्त मनोहर शरीरवाले वे दोनों बालक कमल में दो भँवरों की नाईं एक दूसरे से मुदित होकर मुन…
- Verse 27अल्पकाल मे ही बाल्यावस्था का अतिक्रमण कर नवीन प्रिय उन दोनों ने उदय को प्राप्त सूर्य और च…
- Verse 28तदनन्तर जैसे अपने खोते से उड़कर दो पक्षी अन्यत्र चले जाय, वैसे ही वृद्धावस्था से पीड़ित उ…
- Verse 29पिताओं के मर जाने पर पानी से निकाले गये कमल की भाँति वे दोनों चेहरे से दीन, शरीर से सन्तप…
- Verse 30हे रामजी, उक्त बालकों ने अपने पिताओं की दाह आदि क्रिया कर अत्यन्त विलाप किया, क्योंकि बड़…
- Verse 31श्रीरामजी, तदनन्तर और्ध्वदेहिक (मरण के बाद की) क्रिया कर व्यथाग्रस्त उन दोनों ने शोक से न…