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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 65, Verse 3

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 65, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 65 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

पुनःपुनरुपायाति जलकल्लोलकारणम् । मेघनीलतमःश्यामा संसृतिप्रावृडाकुला ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

जल के तरगों की क्रीड़ाओं की हेतु, मेघो से ओर तज्जनित नील अन्धकारो से श्याम तथा दुःख- कारण संसाररूपी वर्षा ऋतु बार-बार आती रहती है