Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 65, Verse 21
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 65, verse 21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 65 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
महत्यत्राश्रमे तस्मिंस्तापसौ द्वौ बभूवतुः ।
कोविदौ तु नभोमार्ग इव शुक्रबृहस्पती ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
उस बड़े विस्तीर्ण आश्रम में आकाशमार्ग में रहनेवाले बृहस्पति और शुक्र की नाई
शास्त्रों को जाननेवाले विद्वान् तपस्वी, जिनके नाम भी बृहस्पति और शुक्र थे, रहते थे