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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 65, Verse 24

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 65, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 65 · श्लोक 24

संस्कृत श्लोक

आस्तामन्योन्यसुस्निग्धौ सुहृदौ वल्लभौ मिथः । तिलतैलवदाश्लिष्टौ तौ पुष्पामोदवत्स्थितौ ॥ २४ ॥

हिन्दी अर्थ

वे दोनों एक दूसरे के प्रति अत्यन्त स्नेह रखते थे, परस्पर प्यार करते थे ओर मित्र थे। जैसे तिलों में तेल ओर पुष्पों मे सुगन्ध एक दूसरे से मिलेजुले रहते हैं, वैसे ही वे दोनों एक दूसरे से मिलजुल कर रहते थे