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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 65, Verse 30

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 65, verse 30 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 65 · श्लोक 30

संस्कृत श्लोक

तत्रौर्ध्वदैहिकं कृत्वा चक्राते परिदेवनम् । लोकस्थितिरलङ्घ्या हि महतामपि मानद ॥ ३० ॥

हिन्दी अर्थ

हे रामजी, उक्त बालकों ने अपने पिताओं की दाह आदि क्रिया कर अत्यन्त विलाप किया, क्योंकि बड़े-बड़े विद्वान्‌ भी लौकिक स्थिति का उल्लघंन करने में असमर्थ होते हैं