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Sthiti Prakarana (Existence) · Sarga 34

25 verse-groups

  1. Verse 1भी बन्धन में नहीं डाल सकते, इस विषय में भीम, भास और दृढ़ का न्याय दृष्टान्त रूप से दशति ह…
  2. Verses 2–4पूर्वोक्त रीति से शम्बर की सारी सेना कि जिसकी स्थिति बिगड़ चुकी थी, आकाश से गिर कर शरत्‌क…
  3. Verses 5–6अब मैं माया से रचे हुए अन्य दानवो की सृष्टि करता हूँ और उन्हें अध्यात्मशारत्र के ज्ञाता ओ…
  4. Verses 7–9दैत्यराज शम्बर ने बुद्धि से ऐसा विचार कर जैसे सागर बुद्बुदों को उत्पन्न करता हे वैसे ही उ…
  5. Verse 10गरज रहे ओर अस्त्र रूपी बिजली से युक्त उन दैत्यो ने ऊपर के लोकों में आकर वर्षा ऋतु के मेघो…
  6. Verse 11बहुत वर्षो तक देवताओं के साथ उन्होने युद्ध किया फिर भी विवेकवश वे कभी अहंकार को प्राप्त न…
  7. Verse 12उनके हृदय में यह मेरे है, ऐसी वासना जब भी उदित होती थी, तभी यह मैं कौन हूँ, इस प्रकार के…
  8. Verse 13जिनसे उरना चाहिये और जिसके लिए डरना चाहिये, वे दोनों ही मिथ्या है, इस प्रकार से उनमें भय…
  9. Verse 14असत्‌ यह शरीर है ही नहीं, आत्मा में शुद्ध चित्‌ स्थिर है, अहं नाम का कोई दूसरा पदार्थ नही…
  10. Verses 15–18तदनन्तर अहंकाररहित, जरा-मरण से निर्भय, जो वस्तु प्राप्त हो उसे करनेवाले, वर्तमान का अनुसर…
  11. Verses 19–20भीम, भास ओर दृढ से नष्ट की गई देवताओं की सेना हिमालय से गिरी हुई गंगा की तरह बड़े वेग से…
  12. Verse 21जैसे व्यभिचारी पुरुषों के उपभोग से आक्रान्त अतएव भयभीत अकेली नायिका को नायक आश्वासन देता…
  13. Verse 22तदनन्तर वह देवसेना तब तक श्वेतद्वीप में रही जब तक कि भगवान ने शम्बर के विनाश के लिए प्रयत…
  14. Verse 23तदनन्तर भगवान विष्णु ओर शम्बर का बड़ा दारुण युद्ध हुआ, जिसमें प्रलय की तरह अकाल में ही बड…
  15. Verse 24उस युद्ध में शम्बरासुर अपनी सेना, सवारी आदि के साथ शान्त (कालकवल) हो गया । नारायण के हाथ…
  16. Verse 25उस विषम संग्राम में वे भीम, भास और दृढ़ तो जैसे वायु से दीपक शान्त हो जाते हैं वैसे ही भग…
  17. Verse 26यदि कोई कहे कि शम्बर की तरह भीम आदि का भी वैकुण्ठ आदि लोकान्तर में गमन क्यो नहीं हुआ ? तो…
  18. Verse 27हे श्रीरामचन्द्रजी, वासना से युक्त मन बन्धन को प्राप्त होता है ओर वासनारहित मन मुक्ति को…
  19. Verse 28निवसिनिकता की प्राप्ति में जो उपाय है, उसे बतलाते हैं। जैसे यथाभूत वस्तुविषयक सम्यग्‌ दर्…
  20. Verse 29अब सम्यग्‌ दर्शन का प्रकार दशति हैं। अत्यन्त परिपूर्ण परमार्थ सत्य चिदात्मा जो इस दृश्य क…
  21. Verse 30यह सम्पूर्ण जगत आत्मा ही है, इसलिए कौन किस वस्तु की कहाँ पर भावना करे ? भावना भी है ही नह…
  22. Verse 31वासना और चित्त नाम के अर्थ युक्त दो शब्द जहाँ परमार्थ सत्य के दर्शन से विलीन हो गये, वह प…
  23. Verses 32–33वासना से युक्त चित्त यहाँ पर चित्तरूप से स्थिति को प्राप्त हुआ हे । वही वासना से मुक्त हो…
  24. Verse 34वैसे ही ब्रह्मात्मभावना से भीम, भास और दृढ़ का न्याय आपके हृदय में अचल हो
  25. Verses 35–37हे रघुवर, आपको दाम, व्याल और कट का न्याय प्राप्त न हो । हे श्रीरामचन्द्रजी, यह दाम आदि का…