Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 34, Verse 22
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 34, verse 22 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 34 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
अथ क्षीरोदकुहरे तावत्सा सुरवाहिनी ।
उवास यावद्भगवांस्तन्निरासार्थमुद्ययौ ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर वह देवसेना तब तक श्वेतद्वीप में रही जब तक कि भगवान ने शम्बर के विनाश
के लिए प्रयत्न किया