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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 34, Verse 29

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 34, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 34 · श्लोक 29

संस्कृत श्लोक

न सत्यं किंचिदेवेह सद्भावो भावयत्यलम् । नास्त्येव भावना तस्मादित्येतत्सम्यगीक्षणम् ॥ २९ ॥

हिन्दी अर्थ

अब सम्यग्‌ दर्शन का प्रकार दशति हैं। अत्यन्त परिपूर्ण परमार्थ सत्य चिदात्मा जो इस दृश्य की भावना करता है, वह कुछ भी सत्य नहीं है । इसलिए उस दृश्य का दर्शन भी है ही नहीं इसलिए परिशेष से यह स्वप्रकाश चिन्मात्रदर्शन ही सम्यग्‌ दर्शन है