Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 34, Verse 28
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 34, verse 28 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 34 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
सम्यगालोकनात्सत्याद्वासना प्रविलीयते ।
वासनाविलये चेतः शममायाति दीपवत् ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
निवसिनिकता की प्राप्ति में जो उपाय है, उसे बतलाते हैं।
जैसे यथाभूत वस्तुविषयक सम्यग् दर्शन से रत्नतत्त्व का साक्षात्कार होता है वैसे ही चिरकाल के
विचार और समाधि से जनित सत्य आत्मतत्त्व के साक्षात्कार से वासना नष्ट हो जाती है । वासना के
विलीन होने पर चित्त दीपक की नाई नष्ट हो जाता है